को-ऑपरेटिव विभाग में फर्जीवाड़े की परतें उजागर, सचिवों की तैनाती पर बड़ा सवाल

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-उम्र छिपाने को दो-दो प्रमाणपत्र, बाबू–अधिकारियों की मिलीभगत से वर्षों से चलता रहा खेल

बस्ती। उर्वरक वितरण को लेकर लगातार सुर्खियों में रहे सहकारी विभाग में अब सचिवों की तैनाती को लेकर भी गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं। आरोप है कि विभागीय जिम्मेदारों की मिलीभगत से आयु सीमा पूरी कर चुके कई सचिव फर्जी व कूटरचित प्रमाणपत्रों के आधार पर अब भी सेवा में बने हुए हैं। इसको लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि शिकायतें मिलने के बावजूद “सेटिंग–गेटिंग” के सहारे कई सचिव वर्षों से नियमों को दरकिनार कर नौकरी कर रहे हैं। उर्वरक वितरण व्यवस्था पहले से ही सवालों के घेरे में है और अब सचिवों की आयु से जुड़ा यह मामला सामने आने के बाद पूरे को-ऑपरेटिव सिस्टम की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है। जानकारी के अनुसार जनपद के रुधौली, रामनगर, विक्रमजोत, हरैया और गौर विकास खंडों में तैनात कुछ सचिवों की उम्र को लेकर विभाग फिर चर्चा में है। आरोप है कि बाबुओं और अधिकारियों की सांठगांठ से सचिवों के अंकपत्रों और अन्य अभिलेखों में हेराफेरी की गई है। कई मामलों में सचिवों द्वारा विभाग में प्रस्तुत दस्तावेजों में उम्र छिपाने के लिए फेरबदल किया गया है। एक मामला यह भी सामने आया है कि विकास खण्ड रूधौली के- वी पैक्स लिमिटेड जोधीजोत सहकारी समिति के सचिव रामसुमेर चौधरी ने पैन कार्ड और आधार कार्ड के दो-दो दस्तावेज एवं अंकपत्र के जन्मतिथि मेओवरराइटिंग  में  , जिनमें नंबर तो एक ही है, लेकिन जन्मतिथि अलग-अलग दर्शायी गई है। यह खेल वर्षों से चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब तक चुप्पी साधे हुए मलाई खा रहे है अगर सही से जांच की जाए तो रामसमेर चौधरी एवं अन्य सचिव का फर्जीवाड़ा सामने आएगा

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